कहीं अनकही-विचार मंच 05 अप्रैल 2019

आज हिंदी विभाग में कहीं अनकही-विचार मंच की ओर से ‘आज के युवा और जलियांवाला बाग’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया जो जलियांवाला बाग नरसंहार के शताब्दी वर्ष पर किए जा रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला की चौथी कड़ी के रूप में था। इस पूरे कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी प्रवीन मलिक ने किया।

इस परिचर्चा मे डॉ. अरविंद कुमार, शोधार्थी सुनीता कुमारी, शोधार्थी कौशल पाण्डेय, शोधार्थी दिनेश कुमार ने अपने विचार व्यक्त किए।

डॉ. अरविंद कुमार ने जालियांवाला बाग नरसंहार की तत्कालीन परिस्थितियों और उसका साहित्य पर पड़ने वाले प्रभावों पर अपने विचार व्यक्त किए।

शोधार्थी सुनीता कुमारी ने जालियांवाला नरसंहार पर आधारित मंटो की कहानी ‘तमाशा’ के माध्यम से बताया कि इस घटना का प्रभाव युवाओं के साथ – साथ बच्चों की मानसिकता पर भी पड़ा।

शोधार्थी दिनेश कुमार ने भीष्म साहनी के नाटक ‘रंग दे बसंती चोला’ के माध्यम से उस समय की सामाजिक परिस्थितियों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

इससे पहले विभाग में 15 मार्च को ‘जलियांवाला बाग : शहादत के सौ वर्ष’ पर प्रो. अंजू सूरी (अध्यक्ष, इतिहास विभाग) ने अपना वक्तव्य दिया था। 22 मार्च को मूवी क्लब द्वारा ‘जलियांवाला बाग’ फिल्म की स्क्रीनिंग की गई थी और 29 मार्च को ‘ पंजाबी कविता में जलियांवाला बाग ‘पर डॉ. जसबीर सिंह ( इतिहास विभाग) ने वक्तव्य दिया था।

इस कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. राजेश जयसवाल (अंग्रेजी विभाग, यू. एस. ओ. एल. पी. यू.) और डॉ. भवनीत भट्टी (जनसंचार विभाग) भी उपस्थित रहे।

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